अम्बिकापुर 19 जून 2024/ विश्व सिकसेल जागरूकता दिवस के अवसर पर बुधवार को अम्बिकापुर विधायक श्री राजेश अग्रवाल के मुख्य आतिथ्य में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन जिला मुख्यालय अम्बिकापुर के माता राजमोहिनी देवी भवन में किया गया। कार्यक्रम में कलेक्टर श्री विलास भोसकर, सीएमएचओ डॉ आर एन गुप्ता, आदिवासी विकास विभाग के उप संचालक श्री डी.पी. नागेश, सिविल सर्जन डॉ जे.के.रेलवानी, सिकल सेल नोडल डॉ. श्रीकांत सिंह, एनसीडी नोडल डॉ शैलेन्द्र गुप्ता, डीपीएम डॉ पुष्पेन्द्र राम, जिला समन्वयक संगवारी कार्यक्रम श्री विश्विजय, स्थानीय जनप्रतिनिधि सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी, नर्सिंग के छात्र-छात्राएं तथा आमजन उपस्थित थे।
कार्यक्रम में विधायक श्री अग्रवाल ने सिकल सेल के बारे में बताते हुए कहा कि भारत में यह बीमारी जनजाति समूहों में अधिक व्याप्त है और प्रत्येक 86 बच्चों में से एक बच्चे में यह बीमारी पाई जाती है। उन्होंने आमजनों से सिकलिंग जांच अवश्य कराने अपील की। उन्होंने कहा कि विवाह से पूर्व जांच अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विकासखण्ड में प्रदाय सिकल सेल कार्ड का हितग्राहियों को शत-प्रतिशत वितरण कराये जाने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया।
इस अवसर पर कलेक्टर श्री भोसकर ने बताया कि सिकल सेल अनुवांशिक बीमारी है। उन्होंने आमजनों से ज्यादा से ज्यादा अपने नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्रों तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से सहयोग प्राप्त कर निःशुल्क सिकलिंग जांच कराने का आह्वान किया ताकि सिकल सेल की बिमारी से आने वाले पीढ़ियों को बचाया जा सके।
सिकलसेल के बारे में विस्तारपूर्वक दी गई जानकारी-
कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने सिकल सेल के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए बताया कि सिकल सेल एक जेनेटिक बिमारी है जो माता-पिता से बच्चों में आता है। एएस एवं एसएस वाले व्यक्ति आपस में शादी न कर नेगेटिव वाले से ही शादी करना सुनिश्चित करें, जिससे हमारे परिवार से एवं समाज से सिकलिंग का उन्मूलन हो सके। उन्होंने बताया कि जो बीमार व्यक्ति है, उनका ईलाज लगातार चिकित्सक के सलाह से लेते रहने से रक्त चढ़ाने की प्रवृत्ति घटती है तथा अन्य लक्षण में भी सुधार दिखता है। जो एएस एवं एसएस वाले हैं उनकी शादी होने से पूर्व काउंसलिंग कर आने वाले पीढ़ी को सिकलिंग मुक्त किया जा सकता है।
सिविल सर्जन डॉ जे के रेलवानी ने बताया कि इस बीमारी के लक्षण बच्चे के जन्म के 5 या 6 माह बाद से ही दिखने शुरू हो जाते हैं, इस बीमारी से शरीर में दर्द, बैक्टीरियल संक्रमण होना, हाथों और पैरों में सूजन, दृष्टि संबंधी समस्याएं, हड्डियों को नुकसान, एनीमिया और प्यूबर्टी या प्रौढ़ता आने में देरी आदि लक्षण दिखते हैं।
सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में स्क्रीनिंग जांच सुविधा सहित जेनेटिक कार्ड का किया गया वितरण-





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