रायपुर। Raipur Crime News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायुपर में ऑनलाइन महादेव एप के खिलाफ रायपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। उड़ीसा समेत छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन सट्टा खिलाते हुए सटोरिए और खाते किराए पर लेने वाले 15 आरोपित गिरफ्तार को गिरफ्तार किया है। इस मामले में 5 पासबुक, 12 चेकबुक समेत 12 ATM जब्त किए गए हैं। वहीं बैंक खातों में करोड़ों रुपए मिले हैं। साइबर सेल और खमतराई थाना पुलिस ने मिलकर कार्रवाई की है।
आरोपी व्यक्तियों की बिना जानकारी के उनके व्यक्तिगत दस्तावेज और नाम का उपयोग कर बैंको में खाता खुलवाते थे। जिसके बाद आरोपी बैंक खातों में अवैध तरीके से करोड़ों रुपयों का लेनदेन करते थे। इन ट्रांजेक्शंस से आरोपियों को कमीशन मिलता था।
बैंक खातों में महादेव ऑनलाईन सट्टा एप के रुपयों के लेनदेन की बात कही जा रही है। इस मामले में तीन अलग-अलग थानों में दर्ज प्रकरणों के आधार पर 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जिसमें-गुढ़ियारी थाना से 5, खमतराई थाना से 8 और तेलीबांधा थाना से 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पासबुक, एटीएम कार्ड अपने पास रखा और खातों में मोबाइल नंबर भी रजत अग्रवाल ने डलवाया, किसका नंबर डलवाया इस संबंध में प्रार्थी को कुछ नहीं बताया। कुछ दिन बाद रजत ने प्रार्थी को उसके बैंक खाता बंद होने की जानकारी दी। जिस पर प्रार्थी एचडीएफसी बैंक देवेंद्र नगर शाखा जाकर पता किया तो बैंक मैनेजर ने उसके खाते में अत्यधिक पैसों का ट्रांजेक्शन होने से बंद करना बताया गया। रजत अग्रवाल से उक्त बैंक खातों मे हुए ट्रांजेक्शन के बारे मे पूछा तो रजत अग्रवाल द्वारा टाल-मटोल किया जाने लगा। प्रार्थी की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पूछताछ में आरोपित रजत अग्रवाल द्वारा अपने साथी हिमांशु सिंह, मन्टु मांझी, मदन कुमार यादव, मो. उमैर, मोहित टांक, सीए फरहान एवं उपेन्द्र दास के साथ मिलकर उक्त घटना को कारित करना स्वीकार किया गया।

आफिस खोलकर चलाते थे सट्टे का कारोबार
सीए फरहान सहित अन्य आरोपित पंडरी स्थित मोवा में बर्न ब्लैक नाम से आफिस का संचालन करते हैं। इसमें उनके द्वारा लोगों को अपने झांसे में लेकर उन्हें लोन दिलाने सहित अनेक लुभावने स्कीम बताकर उनके व्यक्तिगत दस्तावेजों को प्राप्त करते है। अलग-अलग बैंको में लोगों के बिना जानकारी के उनका बैंक खाता खुलवाकर उक्त बैंक खाते से संबंधित सभी दस्तावेज पासबुक, चेकबुक एवं एटीएम कार्ड अपने पास रखकर बैंक खाता में अपने लोगों का मोबाईल नंबर दर्ज करा देते थे। बैंक खाताओं का उपयोग आनलाइन सट्टा के पैसों के लेन-देन के लिए करते थे।





💬 पाठकों की राय (0)
सभ्य भाषा का प्रयोग करें।