ब्रेकिंग न्यूज़
ग्रामीण की मौत और आरोपों का अंबारब्रेकिंग न्यूज़: सरगुजा में भारी बारिश की चेतावनी!मोदी सरकार के 12 वर्ष मे विकास नहीं, सिर्फ जुमले हुये. जनता इस सरकार से परेशान : गिरीश देवांगनSDM करुण डहरिया व उसके साथियो ने किया आदिवासी किसान की हत्या, 4 गए जेलAmbikapur : मतदाता सूची से वैध नाम हटाने पर कांग्रेस का तीखा हमला, “घोर लापरवाही और लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रहार”ग्रामीण की मौत और आरोपों का अंबारब्रेकिंग न्यूज़: सरगुजा में भारी बारिश की चेतावनी!मोदी सरकार के 12 वर्ष मे विकास नहीं, सिर्फ जुमले हुये. जनता इस सरकार से परेशान : गिरीश देवांगनSDM करुण डहरिया व उसके साथियो ने किया आदिवासी किसान की हत्या, 4 गए जेलAmbikapur : मतदाता सूची से वैध नाम हटाने पर कांग्रेस का तीखा हमला, “घोर लापरवाही और लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रहार”
सरगुजा संभाग

SDM करुण डहरिया व उसके साथियो ने किया आदिवासी किसान की हत्या, 4 गए जेल

द्वारा: SURGUJA TIMESप्रकाशित: 18 फ़रवरी 2026दे देखा गया: 225 बार
अक्षर:
शेयर:f𝕏
SDM करुण डहरिया व उसके साथियो ने किया आदिवासी किसान की हत्या, 4 गए जेल

बलरामपुर/कुसमी । विशेष रिपोर्ट छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में एक प्रशासनिक अधिकारी की कार्यप्रणाली ने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है। कुसमी के विवादित एसडीएम करुण डहरिया और उनके तीन साथियों को एक 62 वर्षीय आदिवासी किसान की पीट-पीटकर हत्या करने...

Advertisement
[GOOGLE ADSENSE - ARTICLE TOP AD]

बलरामपुर/कुसमी । विशेष रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में एक प्रशासनिक अधिकारी की कार्यप्रणाली ने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है। कुसमी के विवादित एसडीएम करुण डहरिया और उनके तीन साथियों को एक 62 वर्षीय आदिवासी किसान की पीट-पीटकर हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। मंगलवार देर शाम भारी पुलिस बल की मौजूदगी में आरोपियों को राजपुर न्यायालय में पेश किया गया।

घटनाक्रम: क्या हुआ था 15 फरवरी की रात?

मामला कुसमी कोरंधा थाना क्षेत्र के ग्राम हंसपुर का है। ग्रामीणों के अनुसार, 15 फरवरी की रात उन्होंने जंगल में अवैध बॉक्साइट से लदे एक ट्रक को पकड़ा था। इसकी सूचना मिलने पर कुसमी एसडीएम करुण डहरिया मौके पर पहुंचे। हैरान करने वाली बात यह थी कि एसडीएम के साथ कोई पुलिस बल या आधिकारिक टीम नहीं थी, बल्कि वे विक्की सिंह उर्फ अजय प्रताप सिंह, मंजीत कुमार यादव और सुदीप यादव नामक स्थानीय युवकों के साथ वहां पहुंचे थे।

ग्रामीण की मौत और आरोपों का अंबार

ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध उत्खनन रोकने के नाम पर एसडीएम और उनके साथ आए युवकों ने वहां मौजूद ग्रामीणों के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट शुरू कर दी। इस मारपीट में हंसपुर निवासी राम उर्फ रामनरेश (62 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। शुरुआती जांच और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर पुलिस ने पाया कि एसडीएम की नाजायज टीम ने बिना किसी वारंट या सुरक्षा प्रोटोकॉल के ग्रामीणों पर हमला किया था।

कानूनी कार्रवाई: बीएनएस की गंभीर धाराओं में केस दर्ज

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कोरंधा थाने में मर्ग कायम करने के बाद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है:

  • धारा 103 (1): हत्या का मामला।
  • धारा 115 (2): जानबूझकर चोट पहुँचाना।
    धारा 3 (5): सामूहिक रूप से अपराध को अंजाम देना।

क्यों हुई वारदात

सूत्र बतातें हैं कि एसडीएम को नाजायज धन का लालच बढ़ गया था, और जिन चोरों को माल लेकर रात के अँधेरे में खनिज संपदा पार कराने का जिम्मा स्वयं SDM लिए थे उसे कुछ ग्रामीणों द्वारा रोक लिया गया था, इसलिए उसके कमीशन में बट्टा लगने वाला था, बड़ीं मुश्किल से SDM डहेरिया सबको मैनेज कर पाया था इसलिए अपना आपा खो गया बस क्या था अपने गाड़ी में रखा डंडा/रॉड जो मिला खुद व उसके पालतू गुर्गे पीटना चालू कर दिए, इतने से जी नहीं भरा तो मृतक और घायल को अस्पताल नहीं थाने तक पहुंचाने खुद चले गए पर पुलिस ने अपनी सूझबूझ से SDM व उसके साथियों को जेल तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

FIR में नायब तहसीलदार का नाम गायब!......

नायब तहसीलदार पारस शर्मा कुनकुरी के रहने वाले हैं और हाल ही में CGPSC में चयन भी हुआ है, लोगों का आरोप है कि उक्त हत्या काण्ड के समय पारस भी मौजूद थे पर मुख्यमंत्री के गृह जिले की वजह से मिस्टर इंडिया बन गए, यही विषय लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

SDM के बिगड़े रवैये का कारण राजनैतिक संरक्षण

Advertisement
[GOOGLE ADSENSE - ARTICLE MIDDLE AD]

SDM डहेरिया कांग्रेस शासन काल में बलरामपुर जिले में कार्यभार ग्रहण किए थे पर सत्ता परिवर्तन होने के बावजूद इनकी कुर्सी जमी रही कारण स्थानीय शीर्ष के नेता ने ही अपनी पार्टी बदल ली और अब सत्ता पार्टी में शीर्ष पद पर पहुँच गए बस और क्या SDM की चाँदी हो गई क्योंकि जिसने यहाँ बुलाया था वही उनके कार्यकाल को बढ़ाने लगे। फिर क्या डहेरिया को लगा पूर्ण कालीन के लिए इस कुर्सी पर जमा रहूंगा इसलिए पत्रकारों को जेल भेजवाने से लेकर स्थानीय सत्ता पक्ष के नेताओं की आवाभगत में लग गए। सबसे बड़ीं बात की वह अपने आप को कुसमी का भगवान मानने लगा।

हत्यारों के लिए चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्थ!....

मंगलवार शाम जब आरोपियों को राजपुर कोर्ट लाया गया, तो इलाके में तनाव को देखते हुए चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पुलिस अब इस मामले में ट्रक मालिक की संलिप्तता और घटना के समय मौजूद अन्य गवाहों के विस्तृत बयान दर्ज कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की और अधिक वैज्ञानिक पुष्टि हो सकेगी।

पूर्व के आपराधिक रिकॉर्ड जानें!

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ ACB (Anti-Corruption Bureau) में खलबली मचा दी थी। यह मामला एक वरिष्ठ अधिकारी की गिरफ्तारी से जुड़ा है, जो न केवल वर्तमान पद पर बल्कि अपने पिछले कार्यकालों में भी विवादों के घेरे में रहे हैं।
यहाँ इस पूरी कार्रवाई और घटनाक्रम का विस्तृत विवरण दिया गया है:

कार्रवाई का मुख्य विवरण

गिरफ्तार अधिकारी: करुण डहरिया (डिप्टी कलेक्टर एवं सीईओ, जनपद पंचायत गरियाबंद)।

  • कार्रवाई करने वाली एजेंसी: एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), रायपुर टीम।
  • रिश्वत की राशि: 20,000 रुपये (ट्रैप के दौरान)।
  • स्थान: गरियाबंद जिला मुख्यालय।
    क्या है पूरा मामला?

ACB की इस कार्रवाई की नींव एक शिकायत पर रखी गई थी। घटना का मुख्य बिंदु बोरवेल्स खनन से संबंधित बिलों का भुगतान था:

  1. शिकायतकर्ता: एक स्थानीय वेंडर/ठेकेदार जिसने जिले में बोरवेल खनन का कार्य किया था।
  2. मांग: ठेकेदार के लंबे समय से रुके हुए बिलों को पास करने के बदले में डिप्टी कलेक्टर करुण डहरिया ने रिश्वत की मांग की थी।
  3. ट्रैप: शिकायत मिलने के बाद ACB ने जाल बिछाया। जैसे ही डिप्टी कलेक्टर ने रिश्वत की रकम स्वीकार की, पहले से मुस्तैद ACB की टीम ने उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया।

विवादों से पुराना नाता
करुण डहरिया का प्रशासनिक करियर काफी सुर्खियों में रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, वे जहां भी पदस्थ रहे, वहां उन पर गंभीर आरोप लगते रहे हैं:

  • विवादित कार्यशैली: उन पर पहले भी तानाशाही रवैये और कार्यों में अनियमितता के आरोप लग चुके हैं।
  • प्रशासनिक छवि: राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी होने के बावजूद, उनकी कार्यप्रणाली को लेकर विभाग के भीतर भी कई बार असंतोष देखा गया था।

हड़कंप का कारण: चूंकि वे एक डिप्टी कलेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पद पर थे, इसलिए उनकी गिरफ्तारी ने अन्य अधिकारियों को भी सतर्क कर दिया है।

Advertisement
[GOOGLE ADSENSE - ARTICLE BOTTOM AD]

🎭 समाचार पर अपनी प्रतिक्रिया दें (Share Your Reaction):

💬 पाठकों की राय (0)

सभ्य भाषा का प्रयोग करें।

अपनी टिप्पणी लिखें (Write Your Comment):

टिप्पणियां लोड की जा रही हैं...
[MOBILE STICKY AD - 320x50]