अंबिकापुर, सरगुजा। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सरगवां सब स्टेशन से जुड़े गांवों के उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली विभाग द्वारा मेंटिनेंस के नाम पर घंटों-घंटों बिजली बंद रखी जाती है,
अंबिकापुर, सरगुजा। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सरगवां सब स्टेशन से जुड़े गांवों के उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली विभाग द्वारा मेंटिनेंस के नाम पर घंटों-घंटों बिजली बंद रखी जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्य दिखाई नहीं देता। लोगों का कहना है कि बिजली बंद रहने के बावजूद तारों से पेड़ों की डालियां नहीं हटाई जातीं, जिसके कारण हल्की हवा या दो-चार बूंद बारिश होते ही बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि वास्तव में नियमित मेंटिनेंस हो रहा है, तो फिर हर बार पेड़ों की डालियां तारों से क्यों टकराती हैं? आखिर तार पेड़ों के बीच से गुजर रहे हैं या पेड़ तारों के ऊपर आ गए हैं? यदि विभाग पूरे फीडर का निरीक्षण करे तो कई स्थानों पर आज भी तारों से सटी हुई शाखाएं आसानी से देखी जा सकती हैं। तारो पे गिरे पेड़
लोगों का आरोप है कि मेंटिनेंस के नाम पर केवल बिजली बंद कर दी जाती है, जबकि फील्ड में कोई ठोस कार्य नहीं होता। इसका सीधा खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है। दूसरी ओर बिजली बिल में किसी प्रकार की राहत नहीं मिलती। चाहे पूरे महीने निर्बाध बिजली मिले या बार-बार कटौती हो, उपभोक्ता को पूरे महीने का बिल चुकाना ही पड़ता है।
कर्मचारियों की भारी कमी, व्यवस्था भगवान भरोसे
स्थानीय लोगों के अनुसार सरगवां सब स्टेशन में लगभग पांच फीडरों का संचालन होता है, लेकिन नियमित कर्मचारियों की संख्या बेहद कम है। बताया जा रहा है कि एक स्थायी कर्मचारी के साथ कुछ आउटसोर्स और संविदा कर्मियों के भरोसे पूरे क्षेत्र की बिजली व्यवस्था चल रही है।
ग्रामीणों का सवाल है कि इतने बड़े क्षेत्र का मेंटिनेंस आखिर इतने कम कर्मचारियों से कैसे संभव है? रात में यदि कोई फॉल्ट हो जाए तो खंभे पर चढ़कर मरम्मत कौन करेगा और सुरक्षा मानकों का पालन कैसे होगा? ऐसे में बिजली बहाल होने में कई-कई घंटे, बल्कि कई बार पूरा दिन लग जाता है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के लिए जब विभागीय अधिकारियों को फोन किया जाता है तो कई बार कॉल तक रिसीव नहीं की जाती। इससे उपभोक्ताओं में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
ग्रामीण क्षेत्र होने का खामियाजा?
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता। उनका आरोप है कि ग्रामीण होने के कारण उनकी आवाज़ अनसुनी कर दी जाती है, जबकि बिजली जैसी मूलभूत सुविधा पर सभी नागरिकों का समान अधिकार है।
- यदि नियमित मेंटिनेंस हो रहा है तो हल्की बारिश और हवा में बिजली क्यों चली जाती है? - तारों से पेड़ों की डालियां समय पर क्यों नहीं हटाई जातीं? - इतने बड़े सब स्टेशन में पर्याप्त कर्मचारियों की नियुक्ति कब होगी? - उपभोक्ताओं को बार-बार बिजली कटौती का खामियाजा क्यों भुगतना पड़ रहा है? - शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और जवाबदेही कब तय होगी?
ग्रामीणों ने बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशासन से मांग की है कि सरगवां सब स्टेशन की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कराई जाए, कर्मचारियों की कमी दूर की जाए तथा मेंटिनेंस कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्रामीणों को बार-बार बिजली संकट का सामना न करना पड़े।
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