Malkangiri Hinsa : सरगुजा से राहत टीम द्वारा किए गए स्थलीय निरीक्षण में हालात अत्यंत दर्दनाक और भयावह पाए गए।
पीड़ित परिवारों ने बताया कि उनके घरों को पूरी तरह आग के हवाले कर दिया गया। कई स्थानों पर हाथ गोले (बम) के प्रयोग से मकानों को गंभीर क्षति पहुँची है, जिससे पूरा क्षेत्र खंडहर में तब्दील हो चुका है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार 200 से अधिक घर पूरी तरह जलकर नष्ट हो चुके हैं।
पीड़ितों का कहना है कि इस भयावह घटना के बाद उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है।
वर्तमान में उनके पास
- न खाने के लिए पर्याप्त भोजन है,
- न रहने के लिए सुरक्षित आवास,
- और न ही पहनने के लिए पर्याप्त कपड़े।

कड़ाके की ठंड के बीच महिलाएँ, बच्चे और बुजुर्ग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं, जिससे उनका जीवन और स्वास्थ्य गंभीर खतरे में है।
प्रशासनिक विफलता के गंभीर आरोप
राहत टीम और स्थानीय पीड़ितों ने आरोप लगाया कि
- अब तक शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस राहत सहायता नहीं पहुँची है,
- पुलिस प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार की प्रभावी सुरक्षा या सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई,
- तथा जब कथित रूप से आदिवासी उग्रवादी एवं हिंसक तत्वों द्वारा घरों को आग के हवाले किया जा रहा था, उस समय सुरक्षा बल और पुलिस प्रशासन मौके पर मौजूद रहते हुए भी हिंसा रोकने में विफल रहे।
पीड़ितों का कहना है कि उस दौरान सुरक्षा बलों और पुलिस प्रशासन ने जलते घरों को खड़े होकर देखा, लेकिन किसी भी प्रकार की तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, जिसके कारण हिंसा और अधिक फैल गई।

राष्ट्रीय मीडिया और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल
स्थानीय लोगों ने गहरी चिंता जताई कि इतनी गंभीर और मानवीय त्रासदी के बावजूद इस घटना को राष्ट्रीय मीडिया में अपेक्षित स्थान नहीं मिला और अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने मौके पर पहुँचकर स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन नहीं किया है।
मानवता की मिसाल बनी राहत पहल
हालाँकि, इस कठिन समय में देश के विभिन्न हिस्सों से बंगाली परिवारों और समुदाय के लोगों ने आगे आकर पीड़ितों की सहायता की, जिससे प्रभावित परिवारों को कुछ राहत और संबल मिला।






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